इंदौर. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि एक बांग्लादेशी आतंकी ने इंदौर में डेढ़ साल तक उनकी रेकी की। करीब से नजर रखने के लिए आतंकी उनके घर पर मजदूरी करने तक पहुंच गया। कैलाश ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में आयोजित रैली में पश्चिम बंगाल में रहने वाले घुसपैठियों के इंदौर में होने से जुड़ा घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि मेरे घर पर निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की खाने की आदत से उन पर शक हुआ, वे सिर्फ पोहा ही खाते थे। इसके बाद मेरी सुरक्षा बढ़ा दी गई। अब जेड सुरक्षा में 6 हथियारबंद जवान साथ चलते हैं।
- विजयवर्गीय ने कहा, ''कुछ समय पहले हमारे यहां निर्माण कार्य चल रहा था। एक दिन करीब 9 बजे रात को घर पहुंचा तो देखा कि काम करने वाले 5 से 6 मजदूर एक थाली में ढेर सारा पोहा लेकर खा रहे हैं। मुझे बहुत अजीब लगा, सुपरवाइजर से पूछा कि इन्हें खाने में रोटी क्यों नहीं देते हो। इस पर सुपरवाइजर बोला कि ये रोटी नहीं, पोहा ही खाते हैं। इस पर मुझे संदेह हुआ और मैंने मजदूरों से पूछा- किस देश के हो, जहां लोग सिर्फ पोहा ही खाते हैं। इस पर मजदूर कोई जवाब नहीं दे पाए।''
- ''सुपरवाइजर ने मुझे बताया कि ये बंगाल के हैं, क्योंकि मैं वहां के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हूं इसलिए मैंने मजदूरों से बंगाल में उनके जिले और गांव के बारे में पूछा। वे कोई जवाब नहीं दे पाए। फिर सुपरवाइजर बोला कि शायद कहीं बाहर के हैं और सस्ते में काम करते हैं। सुबह 9 बजे से 12 घंटे काम करते हैं। दो वक्त का खाना और 300 रुपए रोज लेते हैं। वे मजदूर बांग्लादेशी थे। मुझे शक होने पर उन्होंने काम बंद कर दिया।''
'आतंकी ने मेरी रेकी की, इसके बाद सुरक्षा गार्ड रखे गए'
- विजयवर्गीय ने कहा, ''आपने मुझे कभी सुरक्षा गार्ड के साथ चलते नहीं देखा होगा। मंत्री रहते हुए भी सुरक्षाकर्मी नहीं रखे थे। आपको आश्यर्च होगा कि एक बांग्लादेशी आतंकी डेढ़ साल से मेरी रेकी कर रहा था। बंगाल में एक घुसपैठिए की गिरफ्तारी के खुलासे के बाद मेरी सुरक्षा बढ़ाई गई। अब मैं बाहर निकलता हूं तो 6 गार्ड साथ होते हैं। इंदौर में रहते हुए कभी ऐसा नहीं सोचा था।''
- ''साफ है कि वोट बैंक की राजनीति की खातिर बंगाल जैसे राज्य में घुसपैठिए बड़ी संख्या में रह रहे हैं और उन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। देश में क्या हो रहा है? क्या कोई बाहरी आकर इतना आतंक फैलाएगा? इसलिए सीएए को फैलाई जा रहीं अफवाहों पर ध्यान न दें। यह देशहित में है और इससे असली शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी और घुसपैठिए बाहर होंगे, जो कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं।''